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ग़ज़ल का प्रभाव

                
                                                         
                            मेरी ग़ज़ल पढ़कर मंत्रमुग्ध हो जाती।
                                                                 
                            
उन लाइनो से नाराजगी दूर हो जाती।।

प्रेम को महसूस करती लाइनों में वह।
धीरे-धीरे पढ़ती उससे भूख मिट जाती।।

प्रभाव ग़ज़ल का उसने जाना देरी से।
मुस्कुराती अन्दर ही अन्दर खिल जाती।।

हर असंभव बात सम्भव होते देखती।
खुद भी लिख कर 'उपदेश' जगमगाती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
25 मिनट पहले

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