उनका फोन आया जरूर उठाया न गया।
लफ्ज़ ढूँढ़ते रह गई उन्हें बुलाया न गया।।
याद करके छुअन गुलाबी गाल कर लिये।
उन्हें गले से लगाने का मन बनाया न गया।।
खुशी सुकून में बदलती उससे पहले टीस।
बढ़ती गई दिल में संदेश भिजवाया न गया।।
कुछ वक्त और लगेगा मन को शांत करने में।
दीवाली के मसला 'उपदेश' सुलझाया न गया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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