आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

खुशी सुकून में बदलती उससे पहले टीस।

                
                                                         
                            उनका फोन आया जरूर उठाया न गया।
                                                                 
                            
लफ्ज़ ढूँढ़ते रह गई उन्हें बुलाया न गया।।

याद करके छुअन गुलाबी गाल कर लिये।
उन्हें गले से लगाने का मन बनाया न गया।।

खुशी सुकून में बदलती उससे पहले टीस।
बढ़ती गई दिल में संदेश भिजवाया न गया।।

कुछ वक्त और लगेगा मन को शांत करने में।
दीवाली के मसला 'उपदेश' सुलझाया न गया।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
54 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर