तुम्हारे मुरीद हुए जब से तेरी नजरे मिली।
कुछ वक्त सामने रही फिर कभी न मिली।।
गुफ़्तगू हुई उस दरमियाँ साथ घूमे फिरे भी।
खुशमिजाज शख्सियत फिर कभी न मिली।।
कसम खुदा की एहसास बहुत दिलाती मुझे।
खबर का भी रास्ता टूटा फिर कभी न मिली।।
आस्तिक ज़न का चमत्कार पर भरोसा होता।
नसीब से निकली 'उपदेश' फिर कभी न मिली।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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