बिछड़ने का मेरे हिस्से में गम आया।
उधेड़बुन में जीवित एक वहम आया।।
हकीकत की दुनिया में ख्वाहिशें दूसरी।
उस वज़ह से सीधी राह पर भ्रम आया।।
फ़रिश्ते आये ज़िन्दगी में एक नहीं कई।
हरेक मानव प्रकाश लेकर अहम आया।।
पार कर दरिया मुश्किले आसान होंगी।
गैर आए सफर में खुदा को रहम आया।।
इसे कैसे निकाले उन्हें इस व्यवसाय से।
माफ़िक रहे 'उपदेश' से और दम आया।।
- उपदेश कुमार शाक्यवार 'उपदेश'
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