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बाहों में भर लो

                
                                                         
                            बाहों में मुझको तुम भर लो 'उपदेश'।
                                                                 
                            
सुकून मिलेगा जीने का बेहद विशेष।।

रार की बात छोड़कर प्रेम कर देखो।
हर तरफ पाओगे सुकून के अवशेष।।

अच्छी संगत का सरोकार शान्ति देता।
दुख नही फटकेगा ना ही रहेगा रोष।।

जी लिया बहुत हम ने दूसरों के लिए।
खुद के लिए जिओ बाकी जिंदगी शेष।।

छलावे में किसी को मंजिल मिल सकी!
मंजिल माना जिसे वहाँ दर्द के अवशेष।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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3 घंटे पहले

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