अपने को और ज्यादा बीमार न कर।
बात न कर ना सही और खार न कर।।
दिल तुम्हारे पास बना रहता है हरदम।
खामोशी का मुझपर और वार न कर।।
चाहत समझती मगर ऐतराज क्या है।
यों बनाई दीवारों से और प्यार न कर।।
हम तो जी ही लेंगे जैसे बताओगी तुम।
सिमट रहे दर्द को और लाचार न कर।।
एक दिन सब को बिछड़ना पड़ता यहाँ।
मिले पल 'उपदेश' और दुश्वार न कर।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
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