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अजब सी जिद्द

                
                                                         
                            अजब सी जिद्द थी उनकी खामोश हो गए।
                                                                 
                            
बाते खत्म हो गई 'उपदेश' या बेहोश हो गए।।

रिश्ता बनाते वक्त जो देखना था नही देखा।
उनका व्यवहार 'उपदेश' मगर बहुत चोखा।।

ताल्लुक तोड़ना मुश्किल नही निभाना मुश्किल।
उन्हें बन्धन से 'उपदेश' करीब से देखना मुश्किल।।

हमारी खैरियत पूछना भूले अपनी ही बता देते।
बाहें आसरा चाहती 'उपदेश' प्यार थोड़ा दे देते।।

- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
37 मिनट पहले

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