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आईना वही रहा

                
                                                         
                            आईना वही रहा सूरत बदल रही।
                                                                 
                            
उम्र की साजिश सब को छल रही।।

मन मिले कहते रहे आजतक हम।
झाँक कर देखा हिम्मत पिछल रही।।

दूरियों की वज़ह से मन खिन्न रहता।
बात भी होती नही परछाई ढल रही।।

कोशिश करने पर हार नही होती।
जीतने की चाह में इच्छा मचल रही।।

जो कल था वो आज नही 'उपदेश'।
खुशियाँ चुपके-चुपके निकल रही।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
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3 घंटे पहले

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