वो क्या है,कौन है,कैसा है...
वो कृष्ण है,वो श्याम है....
वो एक प्रेमी है...
किसी का,किसी से।।।
आध्यात्मिक प्रेम है वो या प्रेम ही आध्यात्म है उसका...
राधे के लिए आन है वो,प्रान है..
वो कृष्ण है....वो श्याम है...
वो नटखट है...,छलिया है...
मीरा का वो पूज्य है,ताजाबेगम का प्रेम है...
कृष्ण है,श्याम है...
वो रौद्र है,वो सांद्र है...
शिशुपाल जैसों का काल है...
वो कृष्ण है,वो श्याम है....
वो गुरु है...वो पुरु है...
गीता का वो ज्ञान है,अधर्मियों के लिए त्राहिमाम है...
वो कृष्ण है,वो श्याम है....
वो भाई है,द्रौपदी की कलाई है...
दुशासन की मृत्यु,
पांचाली का वरदान है...
वो कृष्ण है,वो श्याम है...
वो योद्धा है,वो क्षत्रप है...
ऋषियों का वो तुल-जप है...
कंश के वध का दिव नाम है...
वो कृष्ण है,वो श्याम है...
वो नटखट है, चोर भी है...
केशों में उसके पंखीमोर भी है...
वो दानी है,कर्ण के दान का उत्प्रेरक है...
वो दार्शनिक है,मनोवैज्ञानिक है..
राजनीति से दूर,वो निपुण राजनीतिज्ञ है...
वो नटखट है,शैतान है...
वो कृष्ण है,वो श्याम है...
ब्रह्म है वो क्षत्रिय भी...
वो यदु है,वो मृदु है...
वो सर्वसेष है,समरशेष है...
अपराजित है वो,अजितेश है..
वो आन है,तरकश का बान है...
वो कृष्ण है,वो श्याम है...
अर्जुन का रक्षक है,कर्ण का हितैषी है...
युद्धस्थल का सारथी है,सूर्यास्त में सन्यासी है...
वो कौरवों का अस्त भी,दर्पण सा स्पष्ट भी,तनय है वो,अनुनय है,
हाँ वो समय है....
वो सूर्य है,वो चंद्र है...,हस्तिनापुर का उदय है....
वो जलग्नि-सम पूर्ण है,विज्ञान सम अपूर्ण भी...
वो धर्म का कर्पूर है...
जहां अधर्म का विषय हो..
अवनति का फिर ना संशय है...
वो गांधारी का शोक है...
अंतरिक्ष है;भू लोक है..
वो दीप है,वो ज्ञान है...
वो कृष्ण है,वो श्याम है....
वो क्या है,कौन है,कैसा है...
वो कृष्ण है,वो श्याम है....
~उदयराजसिंह'अपराजित
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