तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो,
कुछ तो है जो छिपा रहे हो..
बन जायेंगे जहर, पीते-पीते
ये अश्क जो यूं पिए जा रहे हो!
- हिमांशु त्रिपाठी
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