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मुक्तक

                
                                                         
                            पक्षी पिंजरे में नहीं उन्हें आजाद रखते हैं।
                                                                 
                            
जाल कैसे बिछाऐगा दूर सैय्याद रखते हैं।
मुझे आपस में मत बांटो ऐ सियासतो वाले ,
कि अपने पास हम संगम इलाहाबाद रखते हैं।


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6 वर्ष पहले

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