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आत्मा मर गई माटी का बदन क्या देखें

                
                                                         
                            आत्मा मर गई माटी का बदन क्या देखें।
                                                                 
                            
जो है पतझड़ के गिरफ्त में वो चमन क्या देखें।

खिले गुलशन को तुमने क्रूरता से रौंद दिया,
किसी डाली पर बच गया हो सुमन क्या देखें।

गांधी के देश में गांधी को खारिज करके,
कर रहे लोग जब नाथू का भजन क्या देखें।

जब तेरी जिद है हमें दोगे बेगुनाही की सजा
ऐसे हालात में गवाह समन क्या देखें।

मेरी आवाज जब तुम सुनने को तैयार नहीं
बताओ मुझको तो फिर संसद भवन क्या देखें।

तुम्हारी बात पर अब कैसे यकीं कर ले हम,
राष्ट्रहित में नहीं है तेरे वचन क्या देखें।

मैं प्रमाणित करता हुँ ।
कि यह स्वारचित रचना है।
तिलक राम यादव( तिलक गोण्डवी।


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6 वर्ष पहले

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