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दीवाली का यह अन्तिम पर्व। ।

                
                                                         
                            पौराणिक स्नेह पर्व
                                                                 
                            
भाई दूज सनातन मित्रों,
यम और भातृ द्वितीया
यमुना स्नान पर्व मित्रों।
धन आयुष धर्म यहां से
अर्थ अपरिमित सुख यहां से,
धर्मराज का लेखा जोखा
श्री लिख श्रीगणेश यहां से।
प्रातःकाल चन्द्रदर्शन इसदिन
कायस्थ चित्रगुप्त पूजते,
यमुना घर यम का भोजन
भाई की आयु का बन्ध जोडते।
अन्न वस्त्र और आभूषण
इच्छानुसार भेंट पाने का पर्व,
नाम अनेक उद्देश्य एक है
दीवाली का यह अन्तिम पर्व। ।
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4 hours ago

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