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मर्यादापालक पूजन संवारे कल है।।

                
                                                         
                            कायस्थ समाज से पूजनीय
                                                                 
                            
चित्रगुप्त जी यम के सहायक हैं,
मानव कर्म का लेखा जोखा
मरने केबाद फल निर्णायक हैं ।
भातृ द्वितीया इनकी जयंती
धूमधाम से पूजापाठ होता है,
सृष्टा जन्य द्वादश सुत इनके
श्रद्धानवत नर्क योग मिटता है।
लेखक कलम दवात की पूजा

इरावती शोभावती परिणीता हैं।
जीवन सार विस्तार से लिखते
धरा संतुलन हित न ही दूसरा है।
देव धार्मिक न्यायी बुद्धिमान
शीघ्र कर्ता चमत्कारी विद्वान,
तपस्वी ब्रह्मनिष्ठ वेदशास्त्रज्ञाता
महाकालीउपासक चतुरसुजान ।
कमलनयन श्यामरंग जो सुग्रीव
एक सहस्रवर्ष तपस्या का फल है,
सिर गूढ़ चन्द्र प्रभा सम मुख
मर्यादापालक पूजन संवारे कल है।।
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