एयाशी सजी हैं हाट पर,
खरीदार खडे हैं रात भर
गिना रहे हो खूबियां मकाँ की,
लोग सो रहें फुटपाथ पर
शान से होगी शादी बिटियां की,
आँच न आए मरजाद पर
खाली हो रही जेब तुम्हारी,
इस बेमतलब की बात पर
हकीम कर रहा हिसाब,
गरीब मरीज़ो की खाट पर
पीछे पड़े हैं ये सभी,
हम मुफलिसों की जात पर
- देवर्षी मनीष येंडे
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