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खुशीं

                
                                                         
                            ख़ुशी ढूंढोगे तो मिलेगी ज़रूर
                                                                 
                            
बोली गई बातों में,
सुने हुए अल्फाजों में,
सितारों से भरी रातों में,
सपनों की उन बातों में,
ख़ुशी ढूंढोगे तो मिलेगी ज़रूर |
मिलेगी वहां जहां भी तुम चाहो,
ख़ुशी ही तो हैं, खुद से बनालो ,
अपनो की बातों में ढूंढो ख़ुशी को,
गांवों में शहरो में बाटों खुशी को
हो अपनों से दूर तो यादों में ढूंढो
करीब हो तो उनके इरादों में ढूंढो
तन्हा से लम्हों में दर्पण में ढूंढो
है अपनों की भीड़, तो समर्पण में ढूंढो
ज्यादा नहीं, थोड़ी ही सही
बातों में , यादों में
हर एक इरादों में,
ख़ुशी ढूंढोगे तो मिलेगी ज़रूर ||

तेजस्वी मिश्रा (पायल)
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3 वर्ष पहले

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