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अग़ज़ल

                
                                                         
                            हम अपनी रूह से, इक बार जो,मिल पाते तो अच्छा !
                                                                 
                            
किसी भी रूप में, हम आदमी ,बन जाते तो अच्छा !

हमें अच्छा दिखाना खुद को तो, अच्छा बहुत लगता,
बिचारे दिल में भी अच्छाईयां, भर लाते तो अच्छा !

बड़े आराम से बिछड़ा मेरा घर, कुछ नहीं बोला,
हाँ, बेशक गाँव का ही था, पर ,आते जाते तो अच्छा !

भला हर मंच से देते नसीहत, लड़कियों को क्यों?
तुम अपने घर में ही , बेटे को , समझाते तो अच्छा !

- तनु थदानी
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14 घंटे पहले

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