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मगध का महान सम्राट

                
                                                         
                            क्रूर नृप घनानंद के क्रूरता से,
                                                                 
                            
मगध का सिंहासन डगमगाया था।
चीखती चिल्लाती प्रजा के मन में,
मौर्यवंश ने एक उम्मीद जगाया था।
गुरु चाणक्य के सपनो को,
पूरा करने को दिलो में सजाया था।

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था ।
देवो सा प्रियदर्शी ने अखंड भारत बनाया था।

जंगलों में बचपन बीता,
मां के संरक्षण में पलाया था।
पिता के स्नेह से वंचित रहा,
सिंह को मित्र बनाया था ।
सखा टोली का राजा,
स्वयं को वनराज बताया था।

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था।
बड़ा सुरवीर था देवप्रियदर्शी,अखंड भारत बनाया था।

अभी उम्र कुल चौदह का,
सिंहो के भांति गुर्राया था ।
विष्णुगुप्त की दूरदर्शिता ने,
राजकुमार का हक दिलाया था।
अल्पायु की अवस्था में,
अनेकों पराक्रम दिखाया था।

इहिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था ।
बड़ा सूरवीर था देवप्रियदर्शी,अखंड भारत बनाया था ।

अपनों के षड्यंत्रों ने ,
कई दफा किया उस पे वार ।
दृढ़ निश्चयी वो बालक,
विचलित ना हुआ उसकी तलवार।
शोक से मुक्त कराने वाला,
गुरु को अपना ढाल बनाया था।

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था।
बड़ा सूरवीर था देवप्रियदर्शी,अखंड भारत बनाया था।

अन्य राजकुमारो ने ,
तुच्छ कह चुटकी लिया।
आस्तीन का सर्प बन डांसती,
सौतेली दादी करनेलिया ।
निज हितो की परपंचो से,
कांटो के बीच फूल बन स्वयं को खिलाया था।

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था।
बड़ा सूरवीर था देवप्रियदर्शी,अखंड भारत बनाया था ।

भीतरी इच्छा विरुद्ध स्वजन ,
उस बालक को स्वीकारा ।
अच्छा अवसर पाकर स्वजन,
सिंह को ललकारा और दूधकारा।
कपट तितिक्षा करके वो प्रियदर्शी ,
स्वयं को संभाला और फुसलाया था ।

इहिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था।
बड़ा सूरवीर था देवप्रियदर्शी अखंड भारत बनाया था।

देवनाम या प्रियदशी था
वो था शौर्य का अवतार ।
देश हित्तैशी हर्षित होते
उसके प्राक्रम ओर दुश्मन पे प्रहार ।
नागरिकों के विद्रोहों पर,
तक्षशिला भेजा बिंददुसार ।
बिना खूनी संघर्षों से,
सकलजनो के दिलो पर अधिकार जमाया था

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था।
बड़ा सूरवीर था वो देवप्रीदर्शी अखंड भारत बनाया था

छल कपट करके भाई,
मन ही मन कुचक्र रचाया था।
उसकी माता की हत्या कर,
अघात चोट पहुंचाया था ।
सौतेला था सौतलापन दिखला,
प्रचंड उसे बनाया था ।

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था।
बड़ा सूरवीर था देवप्रियदर्शी अखंड भारत बनाया था।

मां की छीन जाने से ,
ओट पर मारा अपना भाल।
आकाश वक्ष चीरता आया
किया अपना स्वरूप विकराल।
गृहयुद्ध जब छिड़ गया,
भाई को मौत की घाट उतारा था।

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था।
बड़ा सूरवीर था देवप्रियदर्शी अखंड भारत बनाया था।

अपने कुटुंबी बंधुजन,
करते निकृष्ट रोष ओर विरोध।
अपने हितों के प्रपंचों से बेबस,
प्रियदर्शी बना था चण्ड अशोक।
सिंहों से दहाड़ता फुफकारता,
उसको ना कोई रोक पाया था।

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था।
बड़ा सूरवीर था देवप्रियदर्शी अखंड भारत बनाया था

सहस्त्र संघर्षों ओर हथियारों से,
दिया अपने बंधुओ को मार गिराया था।
विराजमान हुआ सिंहासन पर,
रैयत में खुशियां बरसाया था।
सम्राट अशोक को पाकर ,
सबका मन हर्षाया था ।

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था।
बड़ा सूरवीर था देवप्रियदर्शी अखंड भारत बनाया था।

हुआ उदय सौभाग्य पाटलिपुत्र का,
न्यायप्रिय और सत्यवादी राजा पाया था ।
महलों में भी किलकारीया गूंजा,
राजा घर पुत्ररतन जो आया था।
चहुओर खुशहाली ,आनंद आया,
प्रकृति भी चहचहाया था ।

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था।
बड़ा सूरवीर था देवप्रियदर्शी अखंड भारत बनाया था।

अपना राज्य विस्तार हेतु ,
हर भूपति को समझाया ।
ना समझने पर उसने,
अपना शस्त्र भी उठाया।
सभी दुर्गों पे जाकर ,
एक ही झंडा लहराया था।

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था ।
बड़ा सूरवीर था देवप्रियदर्शी अखंड भारत बनाया था।

उत्तर दक्षिण पूर्व पश्चिम,
चारो दिशाओं में संखनाद किया।
हिंदुकुश हो या मैसूर,कर्नाटक
सबके सब विस्तार हुआ।
बांग्लादेश को जीत उसने,
ईरान पर परचम लहराया था।

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था।
बड़ा सूरवीर था देवप्रियदर्शी अखंड भारत बनाया था।

अभिषेचन उपरांत अष्टम वत्सर,
कलिंग दुर्ग पर किया प्रहार ।
भीषण रक्तपात और हिंसा से,
कर लिया उसपे अधिकार।
निरपराध के संहारो ने,
गहरा आघात उसे पहुंचाया था।

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था।
बड़ा सूरवीर था देवप्रियदर्शी अखंड भारत बनाया था।

लहू की सरिता बहता देख,
वक्षस्थल हुआ तार तार।
प्रचंड विजयी पाकर भी,
हुआ उर में पीड़ा आपार।
पश्चाताप की भावना से,
युद्धनीति त्याग धम्म पद अपनाया था।

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था।
बड़ा सूरवीर था देवप्रियदर्शी अखण्ड भारत बनाया था

कलिंग युद्ध से व्यथित राजा,
प्रजा , अन्य जीवो पे बड़ा उपकार किया ।
बना बड़ा दयालु ,शांतिप्रिय राजा,
नेक कार्य विस्तार किया ।
दिख गया हमे वो पथ,
वो सीख भी सीखा गया था।

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था।
बड़ा सूरवीर था देवप्रियदर्शी अखंड भारत बनाया था ।

मगध की मिट्टी हर्षित हो कहती,
अमिट छाप छोड़ गया शिलालेख।
याद करेंगे युगों युगों तक ,
मगध चक्रवर्ती सम्राट महान अशोक।
विश्व महान राजा को याद रखेगी ,
वो स्वयं अमिट निशान बनाया था।

इतिहास के पन्नो ने हमे एक ऐसी कथा सुनाया था।
बड़ा सूरवीर था देवप्रियदर्शी अखंड भारत बनाया था।
-स्वीटी कुमारी सिन्ह
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3 महीने पहले

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