आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

खुद की अलग पहचान बना....

                
                                                         
                            तू अपनी खूबियां ढूंढ ....
                                                                 
                            
कमियां निकालने के लिए लोग हैं |

अगर रखना ही है कदम....
तो आगे रख ,
पीछे खींचने के लिए लोग हैं |

सपने देखने ही है .....
तो ऊंचे देख ,
निचा दिखाने के लिए लोग हैं |

अपने अंदर जुनून की चिंगारी भड़का ,
जलने के लिए लोग हैं |

अगर बनानी है.....
तो यादें बना ,
बातें बनाने के लिए लोग हैं|

प्यार करना है....
तो खुद से कर ,
दुश्मनी करने के लिए लोग है |

रहना है....
तो बच्चा बनकर रह ,
समझदार बनाने के लिए लोग है |

भरोसा रखना है....
तो खुद पर रख ,
शक करने के लिए लोग हैं |

तू बस सवार ले खुद को...
आईना दिखाने के लिए लोग हैं |

खुद की अलग पहचान बना....
भीड़ में चलने के लिए लोग है |

तू कुछ करके दिखा दुनिया को......
बस कुछ करके दिखा ,
तालियां बजाने के लिए लोग हैं |
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर