प्रेम है क्या?
पूछता हूँ मैं,प्रेम है क्या?
जो हो गया है मुझे,
गंगा तीरे से,
या रेती से,
चुपचाप कलकल-सी बहती
कृषक आश्रय, मृदा आश्रय
पाप तारती, ध्यान धारती
एक लीक पर चलती रहती
एक अनकहे आकर्षण के साथ
यह आकर्षण है क्या?
समेटे अनेकों के पाप
ले चली अपने आप
सम्नदर में डुबो देने उसे
किसी सलोने जादू के साथ
जादू है क्या?
पूछता हूँ मैं,जादू है क्या?
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