प्यार को प्यार मिलता नहीं है कभी,
प्यार के पीछे फिर क्यूं भागें सभी।
वक्त के साथ फिर जो बदल जाता है
वक्त रहते कहां वो नज़र आता है।
काश की आह!भरता रहा फिर हृदय,
खो गई भावनाएं, क्रूर हुआ ये निर्दय।
बोल कड़वे लगें आज उसके मुझे,
याद आती नहीं क्या उसकी तुझे।।
और गैरों तरफ रुख वो करने लगा,
न जाने किस नजर पे वो मरने लगा।
चाह मन से मेरे अब उतरता गया,
आंख अश्कों से बह झरता गया।
-सुषमा त्रिवेदी
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