आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बुद्ध

                
                                                         
                            शुद्धोधन के घर लिया ,
                                                                 
                            
जन्म शाक्य कुल बुद्ध।
अल्प मातृ सुख ही मिला ,
जीवन राजस शुद्ध।

नाम लुंबनी ग्राम का ,
गौतम उनका गौत्र।
सिद्धि प्राप्त जन्मे महा ,
शाक्य वंश के पौत्र।

यशोधरा प्रिय भामिनी,
राहुल शिशु नवजात।
जरा मरण दुख मन व्यथित ,
कष्ट भरी थी रात।

पल छिन में त्यागा सकल ,
राजपाठ का मोह।
दिव्य ज्ञान की खोज में ,
घर परिवार विछोह।

देवदत्त के तीर से,
घायल था जब हंस।
प्राणदान उसको दिया ,
कर कर्तव्य प्रशंस।

अनगिन जप तप लीन थे ,
नित आहार निरोध।
वैशाखी की पूर्णिमा ,
पाया सच्चा बोध।

धम्म धर्म निर्माण कर,
सिद्ध साध्य परिवेश।
सारनाथ में बैठ कर ,
दिया प्रथम उपदेश।

अष्टांगिक के मार्ग का ,
लिया सत्य संकल्प।
पंचशील सिद्धांत में ,
बोधिसत्व परिकल्प।

हिरणवती का शालवन ,
कुशीनगर की गोद।
महामोक्ष धारण किया ,
परिनिर्वाण प्रमोद।

भटके तब सिद्धार्थ थे ,
बैठ गए तो बुद्ध।
खुद से खुद लड़ते रहे ,
वह जीवन का युद्ध।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर