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दोहा पंचक. . . . . प्रहार

                
                                                         
                            भारत के आघात  से, पाक हुआ बेहाल ।
                                                                 
                            
लो सेना ने पाक की, छलनी की हर चाल ।।

गीदड़ भभकी पाक की, कर देंगे नाकाम ।
होगा  उसका कल्पना, से बढ़कर अंजाम ।।

कर्जे में डूबा भरे, पाक व्यर्थ हुंकार ।
दम्भी की सामर्थ्य से, परिचित है संसार ।।

भारत अपनी शक्ति का, करता नहीं प्रचार ।
वक्त पड़े तो वेग से, करता  तीक्ष्ण प्रहार ।।

नहीं समझना भूल से, भारत को कमजोर ।
अवसर के अनुरूप यह, वार करे घनघोर ।।
-सुशील सरना 
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एक वर्ष पहले

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