शिव भगवन मात्र नहीं
पूर्ण काल हैं वो
शून्य पे सवार हैं
तो जानो महाकाल हैं वो
महा ब्रह्म हैं जो
ब्रह्मांड ही आकार उनका
हैं गौरी के जब शंकर वो
तो रूप है साकार उनका
हैं साधुओं के चित्त में जब
तो स्वरूप है निराकार उनका
जटाओं में वो बैठा चंद्र
शिव सौम्य का ही पक्ष है
त्रिनेत्र है जो विराजमान
है अग्नि कुंड शक्तिमान
सूर्य भी तो उसका अक्ष है
खुलते कपाट उसके
जब पापी कोई दक्ष है
जय महाकाल।।। हर हर महादेव
- सुशांत
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