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फोन स्क्रीन और पुरानी डायरी

                
                                                         
                            फोन स्क्रीन और पुरानी डायरी
                                                                 
                            

बीते कल की डायरी,
आज की फोन स्क्रीन
से कुछ बात हुई।
गोया के अतीत और
वर्तमान की बात हुई।
पुरानी डायरी को
देख,
चमचमाती फोन स्क्रीन ने दर्प से
कहा,
भला ये भी
कोई बात हुई।

डायरी ने उसाँस भरी
ऑ हल्की से मुस्कान
से पूछा
क्या हुआ?!
मेरे रहने से कोई
परेशां!?!
क्या ये भी कोई
बात हुई?!।
फोन की स्क्रीन
पर उंगलियाँ
चलाते जेन जी
और जेन अल्फा
ने कहा,
हाँ ! हाँ!यही तो
बात हुई।
डायरी ने कहा
महँगे शौक पाले
तुमने!!!
भला ये भी कोई
बात हुई।

आज भी डायरी
जस की तस है
चिर यौवना है।

सीने में रखती है
दिल ओ दिमाग
के सपने और ऐसे
वैसे ख़्याल,
और फिर फोन
की स्क्रीन से पूछती
कहो भाई ये क्या
बात हुई।

डायरी की सादगी
सृजन की बन्दगी
भला महँगे फोन की
स्क्रीन पर,कैसे
उतारेगी ज़िंदगी के
मसले!!!

अब तुम ही कहो
कि ये क्या बात हुई।
काश के फोन की स्क्रीन,
पुरानी डायरी की
वफ़ा से कुछ सीख
कर कहती,
भई वाह ,ये तो कोई
बात हुई।

दो छोर हैं हम
गर हो जाए रज़ामंदी
तो फिर ज़माना कहेगा
हाँ ,!भाई हाँ
ये कुछ जुगलबंदी की
बात हुई !!!
ज़माना भी करवट
ले कहेगा,
फोन की स्क्रीन से
औ पुरानी डायरी से,
हाँ! भाई हाँ!
ये तो कोई बात हुई।
-सूर्यकांत शर्मा
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2 घंटे पहले

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