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मौन हो तुम कौन हो

                
                                                         
                            मौन हो तुम कौन हो,
                                                                 
                            
जीवन में हो या मौन में हो।
शब्द से वाणी,वाणी से जीवन,
पर बताओ तो,तुम कौन हो।
जीवन की सरगम,सांसों की हमदम,
अब तो बताओ कौन हो।
पंच तत्वों की संगम,
त्रिभावों की धड़कन ,
कौन हो तुम कौन हो।
स्थूल से सूक्ष्म,मन से आगे
कौन हो तुम ,कौन हो।
तन में तन्मय मन में मनोमय,
अब तो बता दो कौन हो तुम कौन हो।
जब तक हो ,स्पंदन भी है ,बंधन भी है,
अरमानों की बस्ती में मस्ती ही मस्ती,
अब तो बताओ कौन हो।
तन से आगे मन के धागे,
अब तो बताओ कौन हो।
मन में ढूंढा,धर्म में खोजा,
मंदिर में देखा,मस्जिद में झांका,
और फिर गुरुघर में आंका,
फिर भी ना समझा ,मन ये बांका,
अब तो आ जाओ और बताओ,
कौन हो तुम कौन हो।

सूर्य कांत शर्मा
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4 वर्ष पहले

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