करवा चौथ पर एक क्षणिका
सज-धज कर आज
पिया को रिझाना है,
जन्म -जन्म का
रिश्ता जो निभाना है।
चाहे जमाना
कुछ भी कहे,
मुझे तो पिया की
बांहों में आना है।
तलाशा जिसे मन की
गहराइयों से
पूजा जिसे आत्मा की
निर्मलता से
आज उसी पिया को
बताना है,
कि आज उन्हीं का
ज़माना है।
लाख बैरी हो जाए ,
ये दुनिया,
पर पिया तो बस पिया है,
बस और बस
यही बताना है।
-सूर्य कांत शर्मा
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