आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

करवा चौथ पर एक क्षणिका

                
                                                         
                            करवा चौथ पर एक क्षणिका
                                                                 
                            

सज-धज कर आज
पिया को रिझाना है,
जन्म -जन्म का
रिश्ता जो निभाना है।

चाहे जमाना
कुछ भी कहे,
मुझे तो पिया की
बांहों में आना है।
तलाशा जिसे मन की
गहराइयों से
पूजा जिसे आत्मा की
निर्मलता से
आज उसी पिया को
बताना है,
कि आज उन्हीं का
ज़माना है।

लाख बैरी हो जाए ,
ये दुनिया,
पर पिया तो बस पिया है,
बस और बस
यही बताना है।
-सूर्य कांत शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर