कहता है दिल,,,,,
आजकल कुछ कम ही
कहता है दिल।
बुद्धि के संग मे
कभी कभी सार तत्व
भी कहता है दिल।
दिल एक मुकाम है
जो आत्मा का वितान है।
उसका अपना आयाम है
हर दम हर धड़कन
कुछ ना कुछ कहता
है दिल।
प्रेम के क्यारी में
के
सौहार्द के बीज
बोता है दिल।
अहम और विकार के
झांसे में आ दिल
तब तो
शैतान सा नाचता
औ नचाता है दिल।
पंच तत्व के पुतल में
एक दिल ही तो है
जो आंखों से कभी
छलकता है।
कभी मुहब्बत में
बहकता है
तो कभी इबादत
में महकता है दिल।
उसकी चौखट पे
अपनी धड़कन से
उसकी नौबत बजा
लाता है दिल।
अजब सी
ग़ज़ब सी है
दिल की दुनिया।
रूहानी सी हो
उठती है ये दुनिया
जब प्यार के जज्बे में
उसके इलहाम में
डूब जाता है दिल।
जब प्यार के जज्बे में
उसके इलहाम में
डूब जाता है दिल।
आपका मित्र
-सूर्यकांत शर्मा
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