गुरु वही है,,,
सच्ची मन की बात बता दे,
अपने बोलों से
मन का हर संताप मिटा दे,
रार में भी हंसी दिला दे,
मनुहार से वो दर्द भुला दे,
अपने पराए का बोध करा दे,
संकटों में भी जीना सीखा दे,
हर उलझन को सुलझा दे,
बाज़ का सा जीना सीखा दे।
मित्र अमित्र का भेद सीखा दे,
वीणा वादिनी का रहस्य बतला दे,
गुरु वही है,
जो शिष्य को जीना सिखा दे।
आपका मित्र
-सूर्य कान्त शर्मा।
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