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लफ़्ज़ों की रवानी

                
                                                         
                            ✍️ बस यूँ ही लिखते हैं…
                                                                 
                            
बस यूँ ही लिखते हैं, वजह क्या होगी,
कुछ ख़्वाबों की ख़ुशबू है, कुछ यादें पुरानी,
कुछ दिल की ख़ामोशी, कुछ लफ़्ज़ों की रवानी,
कुछ आपकी मौजूदगी, कुछ अपनी कहानी
कभी चाँद से बातें, कभी तारों से सवाल,
कभी गुज़रे लम्हों का बुनते हैं ख़याल,
कभी किसी मुस्कान में ढूँढ़ लेते हैं जहाँ,
कभी ख़ामोशियों में सुन लेते हैं दास्ताँ।
न कोई शिकवा है, न कोई गिला है,
बस दिल को लिखने का एक सलीक़ा मिला है।
कुछ बातें हैं जो लबों तक आती नहीं,
कुछ यादें हैं जो दिल से जाती नहीं।
राहत ज़रा-सी है, आदत ज़रा-सी,
कभी तन्हाई की, कभी मोहब्बत की,
कभी ख़ुद से मिलने की, कभी किसी को सोचने की…
और कभी यूँ ही, बिना किसी वजह,
किसी के ख़यालों में मुस्कुराने की। 
 
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3 घंटे पहले

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