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ढूँढता फिरता है l

                
                                                         
                            सच में ,
                                                                 
                            
जीवन - -
संघर्ष ही तो है,
तभी तो इंसान - -
जीवन भर ,
संघर्षो से ही - -
लड़ता रहता है l

इसी क्रम में,
किसी ने - -
जीवन को ,
एक माटी के - -
दिया के रूप में ,
माना है - -
और जो ,
सारी रात - -
अंधियारे से,
लडता है l

यह भी ,
बिल्कुल ही ,
सच है कि - -
यह जीवन ,
भगवान का - -
दिया हुआ है ,
तब हमे - -
किस बात से,
डरना है - -
अपने कर्मों से,
नसीब बदला - -
जा सकता है ,
फिर - -
क्यों ?
इधर -उधर ,
अपना मुकद्दर - -
ढूँढता फिरता है l

अंत में ,
सीख लो - -
उस समंदर से,
जो तकड़ाने - -
के लिए ,
पत्थर को - -
ढूँढता रहता है l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
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एक घंटा पहले

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