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गौरी पुत्र गणेश

                
                                                         
                            दुंदाला दुखभंजना सदा न बाली भेष।
                                                                 
                            
सारा पहली समरिये गवरी पुत्र गणेश।
जप तप पूजा मुहर्त सब में पहले देव।
शुभ में शीघ्र पधारिये गौरी पुत्र गणेश।

प्रथम पूज्य देव तुम्हे समर्पित हुए हम।
विघ्नहर्ता तुम दुख कष्ट हरते है गणेश।
ज्ञान ध्यान आशीष बन्दना सबमें एक।
पूजापाठ शुभकाम में पहले श्रीगणेश।

गौरीनंदन गौरीपुत्र गणाधिपति गणेश।
वक्रतुंड आराध्य एकदंत बुद्धि दातार।
सुमुख एकदंत कपिल गजकर्णक देव।
कोटि कोटि नाम से गणेश हुए विशेष।

भादो चौथ का प्राकट्य हुआ घर घर।
प्राण प्रतिष्ठा करे प्रतिमा बैठाते जात।
रोग शत्रु दरिद्रता बाधा सब दूर करते।
सुख समृद्धि बढ़ती बुद्ध दोष हर लेत।

-सुरेश गुप्ता
 
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2 वर्ष पहले

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