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चेहरों के बदलते रंग

                
                                                         
                            किसी ने ,
                                                                 
                            
सच ही कहा है कि - -
यहाँ आकर ,
लोग - -
रंग अपने - अपने,
ढंग से - -
बदल लेते हैं ,
ऐसा नहीं कि - -
मेरा रंग,
नहीं निखरा था - -
रंग मेरा भी ,
निखरा था - -
पर मैं ,
मेंहदी की तरह - -
पीसता ही रहा l

मैं सचमुच ,
बेचैन हो गया था - -
रात -रातभर,
अपना दुःख - दर्द - -
कागज पर,
लिखता ही रहा - -
इस प्रकार ,
जब सब झूल रहे थे - -
बुलंदियों पर ,
मानों में - -
आसमान में ,
सितारों के बिच - -
चाँद की तरह,
छिपता ही रहा l

अगर मैं ,
नाजुक होता तो - -
कभी का ,
टूट गया होता - -
लेकिन मैं तो,
ठहरा नाजुक डाल - -
सबके आगे,
झुकता ही गया l

जिन्हें था जल्दी,
वो बढ़ने लगे - -
अपने,
मंजिल की ओर - -
मैं तो समंदर की - -
राज जान,
उसकी गहराई में - -
डूबता ही रहा l
-सुरेश कुमार झा 'अल्हर'
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एक घंटा पहले

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