सुनो मेरे गांव के लोगों ,
ये सवाल जीत का नहीं , प्रतिष्ठा का नहीं ,
गुरूर का है , जिसे टूटना होगा , बिखरना होगा ।
उन्हें समझना होगा , हमें समझना होगा
रावण और दुर्योधन की कथाएं याद दिलाओ
कंश वध का पाठ सुनाओ,
इन्हें भ्रम है अर्जुन के श्रेष्ठ धनुर्धर होने का
राह दिखलाओ, कर्ण का मर्म समझाओ,
भ्रम है इन्हें अमरता सहज मिल गई ,
कष्ट बताओ नीलकंठ कहलाने का ।
क्या राज्य की शिला टिकी है धन पर,
या राज मंत्रियों के प्रपंच पर
देखो टिकी है त्याग व दान पर,
इन रत्नों का मोल क्या होगा,
वार दिया उस धाय मां ने अपना पुत्ररत्न होगा।
इससे पवित्र त्याग क्या ,वफादारी क्या,
न ऐसा हुआ न आगे होगा।
इन्हें समझना होगा ,राष्ट्र को बचाना होगा
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