तुम्हें जी भरकर देखा करती हूँ,
हर साँस में तुमको रखा करती हूँ।
चाहे मैं छू ना सकूँ तो भी हर पल,
नज़रों से तुम्हें स्पर्श किया करती हूँ।
मैं अच्छे से तुम्हें चाहा करती हूँ !
तुम्हें जी भरकर देखा करती हूँ !
तेरी मुस्कान में सवेरा पाती हूँ,
तेरे ख़यालों में रोज़ नहाती हूँ।
लफ्ज़ों से क्या कहूँ अभिव्यक्ति
तुझमें ही खुद को खोया करती हूँ।
मैं दिल का रिश्ता निभाया करती हूँ !
तुम्हें जी भरकर देखा करती हूँ !
-सुरेंद्र कुमार "सूरज"
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