शहर, कस्बा हमारा याद क्यों आता नहीं देखो
न जाने क्यों मकां अब गाँव का भाता नहीं देखो
हृदय की पीर गाए तो भी मुस्काते हैं जग वाले
जहां का कोई रिश्ता साथ अब जाता नही देखो
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