इन थकी हुई आंखों में
तुझे बसाना चाहे मन...
इन बिखरी हुई जुल्फों को
सजाना, संवारना चाहे मन
तू खिल उठे
इस फिज़ा में
ऐसी बहार मैं ला दूं
चमन हो, चमन में आशियां हो
साजे सितार बजा दूं
तू मुस्कुराए मंद मंद
हसीन सपने सजाए मन
तेरी इन सुरमई आंखों में
काजल लगाना चाहे मन...
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