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वृक्षारोपण

                
                                                         
                            पौधों पर लुटाया प्यार।
                                                                 
                            
इतना दिया आदर सत्कार।
इसके पीछे क्या है विज्ञान
सुन लो जरा लगा कर ध्यान।परोपकार ही जिसका काम।
औरों का जो रखता ध्यान।
गैस विषैली खुद पी जाता।
वदले में देता जीवन दान।
जो मानवता के हित कट जाता।जिसका वलिदान व्यर्थ ना जाता।शीतल छाया देकर हमको।
सारी गर्मी खुद सह जाता ।
पक्षी का जो रैन वसेरा।
कलरव करते सुबह सवेरा।
उसका कोई नहीं है सानी।
परोपकार है जिसकी कहानी।
(अधिक से अधिक पेड़ लगाओ,जीवन को सुन्दर वनाओ)


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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7 वर्ष पहले

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