चक्रव्यूह में अभिमन्यु
मुझे चक्रव्यूह में फँसाने की साज़िश चल रही है,
लगता है मेरी कामयाबी सबसे भारी चल रही है।
मेरी उड़ान रोकने को परिंदे जुट गए सारे,
मेरे हौसलों के आगे हर दीवार हारी चल रही है।
मैं अभिमन्यु हूँ, मुझे संघर्ष विरासत में मिला है,
मेरे लहू में आज भी रणभूमि की चिंगारी चल रही है।
तुम्हें लगता है कि मैं हर चाल से अनजान हूँ,
मेरी ख़ामोशी में भी रणनीति तुम्हारी चल रही है।
न मैं झुककर जिऊँगा, न डरकर पीछे हटूँगा,
मेरी मंज़िल के लिए जंग लगातार जारी चल रही है।
तुम चक्रव्यूह रचते रहो, मैं रास्ते बनाता रहूँगा,
मेरी हिम्मत के आगे हर चाल तुम्हारी बेअसर होने वाली है।
इतिहास गवाह है, जो तूफ़ानों से टकराते हैं,
वही लोग एक दिन कामयाबी की मिसाल बन जाते हैं।
याद रखना, मुझे गिराने की कोशिश करने वालों,
अभी तो मेरे संघर्ष की पहली पारी चल रही है!
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