इधर राम बेचैन है
उधर रहीम बेचैन है !!
राम के यहाँ, रहीम को खतरा
और रहीम के यहाँ, राम को खतरा !!
अजीब है, समझ नहीं पा रहे हम
न राम को
और न रहीम को !!
अरसो बीत गए, नहीं बटती घर घर
ईद पर सेवईंयां
और दिवाली पर मिठाइयां !!
सीखा था सभी धर्म-भगवान् एक है
फिर अचानक सभी अलग अलग कैसे हो गए
ईश्वर-अल्लाह एक और धरम अलग अलग हो गए !!
आओ सभी एक हो जाएँ
और सब मिलकर राम-रहीम को बचाएं !!
कुछ तुम करीब आओ, कुछ हम करीब आएं
आओ मिलजुल कर राम-रहीम का देश बनायें !!
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