उस आलीशान घर में
झूलते रेशमी पर्दे
कितने मुलायम
कितने झीने
संगमरमरी गमलों पर
फूल और तितलियां
वो एसी की महीन
मुलायम हवाएं
वो दूधिया जलते बल्ब
और शीतल फर्श
जगमगाती सीढ़ियां
सब नर्म
सब कोमल
जैसे रुई के फाहे हैं
जगह-जगह पर।
पर
ऐसा कुछ भी नहीं यहां
पत्थरों में कैद सब कुछ
यहां तक कि
सीने में धड़कते दिल भी
सख्त है
पत्थरों की तरह
सर्द भी
-सुनील गुप्ता
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