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आँखों का नूर : शाहमीर

                
                                                         
                            आया था बनकर ख़ुशी, आँखों का नूर हो गया,
                                                                 
                            
पल भर में ही हमसे वो क्यूँ इतना दूर हो गया।

सोचा था, उसकी किलकारी से घर महकेगा,
वो ख़ामोशी दे गया, आँगन भी बेनूर हो गया।

दुनिया में आया था, मगर दुनिया न देख पाया,
गोद में आने से पहले ही वो हमसे दूर हो गया।

अभी तो नाम भी उसका, ठीक से रखा न था,
वो ख़ामोश हुआ और दिल चूर-चूर हो गया।

जिसे जी भरके देखा भी नहीं, उसे खो बैठे,
एक पल में ही मुक़द्दर भी मजबूर हो गया।

जिसके आने की ख़ुशी में, था सजा घर सारा,
उसके जाते ही मेरा आँगन भी बेनूर हो गया।

तेरी मासूम-सी तस्वीर संभालकर रखी है,
तू गया दूर, मगर आँखों का नूर हो गया।

जिगर का टुकड़ा था वो, मेरे रब की अमानत था,
कुछ पलों का ही सुकून देकर, आज दूर हो गया।

 
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25 मिनट पहले

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