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ग़ज़ल: ग़म की आँधी से डरते नहीं हैं

                
                                                         
                            ग़म की आँधी से डरते नहीं हैं
                                                                 
                            
ये चिराग-ए-मोहब्बत हैं, बुझते नहीं हैं

पलकों के पर्दे से रुकते नहीं हैं
ये नजर-ए-कयामत हैं, छिपते नहीं हैं

हया के नकाब से उलझते नहीं हैं
ये इबादत-ए-मोहब्बत है, छेड़ते नहीं हैं

राह के पत्थर से थकते नहीं हैं
ये जुनून-ए-मंजिल है, घबराते नहीं हैं

बुराई की गर्द से मिटते नहीं हैं
ये हिम्मत-ए-इख्लास है, सहमते नहीं हैं

दुनिया की रस्मों से ऊबते नहीं हैं
ये दस्तूर-ए-मोहब्बत है, भूलते नहीं हैं

लोगों की बातों से मुरझाते नहीं हैं
ये दास्तान-ए-मोहब्बत है, जताते नहीं हैं

डॉ सुकृति घोष
ग्वालियर, मध्यप्रदेश
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4 वर्ष पहले

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