ग़म की आँधी से डरते नहीं हैं
ये चिराग-ए-मोहब्बत हैं, बुझते नहीं हैं
पलकों के पर्दे से रुकते नहीं हैं
ये नजर-ए-कयामत हैं, छिपते नहीं हैं
हया के नकाब से उलझते नहीं हैं
ये इबादत-ए-मोहब्बत है, छेड़ते नहीं हैं
राह के पत्थर से थकते नहीं हैं
ये जुनून-ए-मंजिल है, घबराते नहीं हैं
बुराई की गर्द से मिटते नहीं हैं
ये हिम्मत-ए-इख्लास है, सहमते नहीं हैं
दुनिया की रस्मों से ऊबते नहीं हैं
ये दस्तूर-ए-मोहब्बत है, भूलते नहीं हैं
लोगों की बातों से मुरझाते नहीं हैं
ये दास्तान-ए-मोहब्बत है, जताते नहीं हैं
डॉ सुकृति घोष
ग्वालियर, मध्यप्रदेश
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