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काश मेरी दुआओं में असर हो जाए

                
                                                         
                            उसके चेहरे पे खिली हँसी,
                                                                 
                            
के पीछे छिपे दर्द को,
दूर करने का मन करता है।
सारे कीचड़ को समेट लूँ,
बस उसे आकाश में उठते हुए,
कमल के जैसे,
खिलते हुए देखने का, मन करता है।

मन गंगा के जैसे है उसका,
करुणा आँखों से बहती है,
ममता की मूरत लगती है मुझको,
जैसे प्रेम का सागर लिए उतरी हो,
उसकी इन पवित्र भावनाओं को,
सब तक पहुंचाने का, मन करता है।

सब गुण पूर्ण लगते हैं उसमें,
पर फिर भी अधूरी-सी लगती है,
मानों ढूँढ रही हो बसेरा,
लगता है जैसे -अब भी उसका,
मानों सफ़र है -अधूरा,
उसके सफ़र को पूरा करने का, मन करता है।

उसकी कहानी कुछ अपनी-सी लगती है,
दिल से दिल की रवानी कुछ अपनी-सी लगती है,
उसकी जिंदगी के सुने किनारों को,
खुशियों की बयार से भरने का, मन करता है।

कुछ दिल का रिश्ता-सा लगता है उससे,
जैसे मानों सदियों पुराना नाता हो ,
इस जन्म रिश्ते का तो पता नहीं, पर
उसके पाक दामन को बचाने के लिए,
दिल की बात को दिल में ही रखने का, मन करता है।

काश मेरी दुआओं में असर हो जाए,
उस पर रब की महर हो जाए,
दिल में जो अरमान लिए बैठी है,
वो सब पूरे हों जाएं,
बस हर पल यही दुआ करने का मन करता है,
मन करता है,मन करता है।।
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एक घंटा पहले

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