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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

BETI BACHAO BETI PADHAO
                
                                                         
                            घर -घर में अभियान चलाओ
                                                                 
                            
बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ

जन - जन की पहचान है बेटी ,
खुशियों का अरमान है बेटी
आँखों - में कुछ सपने लेकर
जीवन का निर्माण है बेटी |

जगत विजेता था तू मानव
बनता जाता क्यों रे दानव
नन्ही बिटिया का मोल न जाना ,
कैसा - तेरा ताना - बाना|
कल की चिड़िया के दो पंख लगाओ
बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ |

बेटी समाज का नया सवेरा ,
अन्धकार - ने उसको घेरा
नयी किरण की आशा लेकर
अंध कुरीतियों को दूर भगाओ
घर -घर में अभियान चलाओ
बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ |

जब -जब अत्याचार बढे है ,
बेटी- ने इतिहास गढ़े है
कन्या भ्रूण हत्या कर तू बनता अंजाना
बेटी तेरे सूनेपन के होठो का अफ़साना
भारत के कोने -कोने से
कानो में अब शंख बजाओ
बेटी बचाओ - बेटी- पढ़ाओ |

पढ़ेगी - बेटी- बढ़ेगी बेटी
नए शिखर पर चढ़ेगी - बेटी
नव नूतन के अग्रिम पथ पर ,
कदम मिलाकर बढ़ेगी बेटी
घर की खुश हाली है बेटी
महकी फुलवारी है - बेटी
जीवन का आधार बनाओ ,
बेटी बचाओ -बेटी पढ़ाओ|

कवि सुधीर सिंह चौहान
लखीमपुर खीरी U.P
7753869459

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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8 वर्ष पहले

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