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शिव स्तुति

                
                                                         
                            रहे मतवाला, ओढ़े मृगछाला, देव भोला भाला शंभु हरे,
                                                                 
                            
नागो की माला, डमरू विशाला, भक्तों के दुख को दूर करें।

जटा में गंगा, माथे पर चंदा, कंठ में विष की धार बहे
भस्म रमाए, सबको अपनाए, ऐसा रूप श्रृंगार करे।

कैलाश के वासी, घट-घट के निवासी, पावन प्रभु काशी, धाम किए
जो भी द्वार आए तेरे, कष्ट कटे हैं घनेरे पूरण दुखियों के तूने काम किए।

शमी, भांग धतूरा, बेलपत्र पूरा पूरा, जो श्रद्धा से प्रभु चढ़ाते हैं,
शिव भोला भंडारी, संकट भय हारी, उसके सोये भाग्य जगाते हैं।

डम डम डमरू बाजे, शिव अविनाशी नाचे, सारी सृष्टि भी संग नाच उठे,
शंभू नाम तुम्हारा, जो भी मन से उचारा, भवसागर से पार लगे।

सजा रहे श्रृंगार, वंश में हो संस्कार, चिर जीवे और बलवान बने,
ऐसे काम कर जाए, सदा धर्म निभाए, सत्कर्मों से यशवान बनें।

दिव्य शक्ति भंडारी, सुधा भक्त तिहारी, सुखी पीहर और ससुराल रहे,
माता गौरा के सुहाग, मैं भी मांगू वर आज, मेरे दोनों ही कुटुंब खुशहाल रहे।
 - सुधा पाण्डेय
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एक घंटा पहले

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