किसी की याद में डूबे सुबह से शाम हो जाना,
हर एक एहसास में शामिल किसी का नाम हो जाना,
नहीं कोई भेद बचता है जहां प्रियतम व प्यारी में,
न हो तो देख लो राधे का राधेश्याम हो जाना।
ये बंधन तोड़ के जग के सबसे अंजान हो जाना,
प्रेम के रंग से धूमिल खुद की पहचान हो जाना,
ये प्रेम की ही है महिमा जिसको ये जग सिर झुकाता है,
राधे का नाम मुरली की सुरमई तान हो जाना।
बडा मुश्किल है पाहन से महा ब्रजराज हो जाना,
वो वृंदावन में जमुना तट का पावन रास हो जाना,
ये राधा-कृष्ण का बंधन नहीं है देह का बंधन,
मिलन ये आत्मा का है मिलके गोधाम हो जाना।
मिटा कर मैं को मन से कृष्ण का ही दास हो जाना,
उन्हीं की प्रीत में पागल, उन्हीं के साथ हो जाना,
यही है प्रेम की गरिमा, यही है सार गीता का,
कि राधा कृष्ण से दोनों का राधेश्याम हो जाना।
स्वयं के नाम से ऊंचा प्रिये का नाम हो जाना,
फिर एक दूजे के मन मंदिर में अपना धाम हो जाना,
है राधा कृष्ण में व्याप्ति नहीं कोई भेद बचता है,
युगल जोड़ी के दर्शन से पूरण सब काम हो जाना।
-सुधा पाण्डेय
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