ट्रेंड प्रोटेस्ट को बस बढ़ावा दिया,
झूठ ने भी है सच से छलावा किया,
गर बुरे हैं जमाने के सब मर्द तो,
बाप भाई से क्यों है दिखावा किया ।।
पहरा सीमा पे देते जो वो मर्द है,
भूले त्याग जो उनका वो बेदर्द है,
जिसने नाजों से पाला क्यों भूले उसे ,
जिसकी गोदी में तुमने है खाया - पिया।।
नर और नारी बुरे हैं भले भी यहां ,
कुछ दयालु है कुछ मनचले भी यहां,
लेखा- जोखा कर्म का है चलता सदा ,
पाप - पुण्य से खुद को चढ़ावा दिया।।
कभी नारी ने मर्दों को खाक किया,
मर्दों ने भी अक्षम्य अपराध किया,
यहां भरोसा किसी पर कभी न होगा ,
अविश्वास को सबने बुलावा दिया।।
सोनम हो या सिया हो या कोई बला,
कभी नारी कभी नर गया है छला,
थोड़े दिन का ही शोर होता है यहां,
सही किसी ने फैसला न किया,
गर स्वयं को सुधारे यहां पर सभी,
न कलंकित होगे नर या नारी कभी,
नीति - नियमों का पालन सदा ही करें,
सभी धर्मों में इसका हवाला दिया।
ट्रेंड प्रोटेस्ट को बस बढ़ावा दिया,,
-सुधा पाण्डेय
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