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संस्कारी मैं भी रहा घराने से और घर से तू भी खानदानी है

                
                                                         
                            तस्वीर मेरी भी पुरानी है तस्वीर तेरी भी पुरानी है
                                                                 
                            
तू भी दिख रही है जवां मुझ पर भी आई जवानी है

अब एक दूसरे को ऐसे याद करके सोचते है हम
आंख में मेरे भी पानी है आंख में तेरे भी पानी है

है शायद मुकम्मल जिंदगी तेरी भी और मेरी भी
पर अधूरी थी मेरी और अधूरी तेरी भी कहानी है

कभी एक जान और एक जिस्म थे हम दोनो
आज मैं किसी का राजा हूं और तू भी किसी की रानी है

अक्सर बैठ पेड़ के नीचे, बातें की हम दोनों ने
अब लगता है कि रह गयी वो , जो बात तुझे बतानी है

हमने सिर्फ अपना नहीं, घर और समाज का भी सोचा है
संस्कारी मैं भी रहा घराने से और घर से तू भी खानदानी है

क्या भरोसा करूं मैं सुखी इस जिस्म-ए-लिबास का
जलेगा जिस्म मेरा भी और आग तुझे भी लगानी है
-सुखप्रीत सिंह "सुखी "
 
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3 hours ago

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